भारत मे खेती अब केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नही रह गई है। बल्कि मिट्टी की उर्वरता, पानी का संरक्षण, रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करना और किसानो को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसी के तहत Paramparagat Krishi Vikas Yojana (PKVY) को जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली प्रमुख योजनाओं मे शामिल किया गया है। वर्ष 2026 मे भी Paramparagat Krishi Vikas Yojana 2026 जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए लागू प्रमुख योजनाओं मे से एक है।
योजना का फोकस केवल जैविक खाद या इनपुट उपलब्ध कराने तक सीमित नही हैं बल्कि किसानो को जैविक उत्पादन, प्रमाणन, प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, वैल्यु एडिशन और बाजार से भी जोड़ना है। अगस्त 2026 मे केन्द्र सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार योजना के तहत लगभग 18.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती के दायरे मे आ चुका था और करीब 33.63 लाख किसान इससे लाभान्वित हुए थे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि योजना के तहत 3 वर्ष के लिए 51 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता का प्रावधान है। इसमे किसानो को जैविक इनपुट के लिए 15,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता का प्रावधान है। बकाया राशी प्रशिक्षण, प्रमाणन, मार्केटिंग और अन्य गतिविधियो के लिए निर्धारित है। अगर आप भी जानना चाहते है कि Paramparagat Krishi Vikas Yojana 2026 क्या है, किन किसानो को लाभ प्राप्त होगा, आवेदन कैसे करेंऔर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यो मे इसका लाभ कैसे लिया जा सकता है? यह जानकारी आपके लिए उपयोगी है।

Paramparagat Krishi Vikas Yojana 2026 क्या है?
Paramparagat Krishi Vikas Yojana (PKVY) वर्ष 2015 मे शुरू की गई एक जैविक खेती को प्रोत्साहित करने वाली एक केन्द्रीय प्रायोजित योजना है। यह योजना राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) के तहत शुरू की गई है। इस योजना का उद्देश्य किसानो को टिकाऊ और जैविक कृषि पद्धतियां अपनाने मे मदद करना तथा जैविक उत्पादो के लिए उचित स्पलाई चेन तैयार करना है। PKVY मे किसानो को अकेले लाभ देने के बजाए क्लस्टर आधारित जैविक खेती पर जोर दिया जाता है। इसमे एक खेत मे किसानो को प्रशिक्षण देना, जैविक खेती की निगरानी करना, प्रमाणन कराना और सामूहिक रुप से उत्पाद को बाजार तक पहुंचाना आसान होता है।
Paramparagat Krishi Vikas Yojana को राज्यो और केन्द्र शासित प्रदेशो के माध्यम से लागू किया जाता है। साल 2024 मे कृषि क्षेत्र की केन्द्रीय प्रायोजित योजनाओं के युक्तिकरण के बाद Paramparagat Krishi Vikas Yojana को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के अन्तर्गत शामिल किया गया है। इसमे पंरपरागत कृषि विकास योजना को बढ़ावा देने वाली योजना के रुप मे मंजूरी दे दी गई थी।
Paramparagat Krishi Vikas Yojana 2026 एक नज़र में
| योजना का नाम | Paramparagat Krishi Vikas Yojana |
| शुरू की गई | केन्द्र सरकार द्वारा |
| कब शुरू की गई | साल 2015 |
| प्रमुख उद्देश्य | जैविक एंव टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना। |
| सहायता अवधि | 3 वर्ष |
| कुल सहायता | 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर |
| किसान को DBT | 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर |
| मार्केटिंग/पैकेजिंग | 4,500 रुपये प्रति हेक्टेयर |
| प्रमाणन/विषलेषण | 3,000 रुपये प्रति हेक्टेयर |
| प्रशिक्षण/निर्माण क्षमता | 9,000 रुपये प्रति हेक्टेयर |
| प्रमुख मॉडल | क्लस्टर आधारित जैविक खेती |
| क्रियान्वयन | राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारो द्वारा |
| जून 2026 तक कवरेज | 18.93 लाख हेक्टेयर |
| जून 2026 लाभार्थी | 33.63 लाख किसान |
PKVY 2026 के तहत कितनी आर्थिक सहायता मिलती है?
Paramparagat Krishi Vikas Yojana के तहत तीन वर्षो मे 31 हजार 500 रुपये प्रति हेक्टेयर वित्तीय सहायता दिये जाने का प्रावधान है। यह पूरी राशी एक बार मे ही किसानो के बैंक खाते मे नही भेजी जाती है। बल्कि योजना के विभिन्न उद्देश्यो के लिए निर्धारित ढाचें के अनुसार उपयोग की जाती है। इसमे सबसे महत्वपूर्ण भाग 15 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर है जो किसानो को On-Form और Off Form जैविक इनपुट के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसरफर (DBT) के माध्यम से दी जाती है।
बाकि सहायता योजना के अन्तर्गत जैविक खेती से जुड़े अन्य कार्यो जैसे प्रमाणन, प्रशिक्षण, निर्माण क्षमता, विपणन, पैकेजिंग और ब्रांडिग जैसी गतिविधियो को समर्थन देने के लिए उपयोग की जाती है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि 31 हजार 500 रुपये सीधे किसानो के खाते मे मिलने वाली नकद राशी मानना सही नही है। किसानो के लिए प्रत्यक्ष डीबीटी वाला प्रमुख घटक 15 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर है।
PKVY के तहत 31,500 रुपये कैसे मिलते है?
केन्द्र सरकार के निर्धारित मानको के अनुसार 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की कुल सहायता अलग-अलग गतिविधियो के लिए निर्धारित की गई है।
- जैविक इनपुट के लिए – Paramparagat Krishi Vikas Yojana मे किसानो को 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता डीबीटी के माध्यम से दी जाती है। यह राशी ऑन-फार्म ऑफ-फार्म जैविक कम्पोजिट सहित ऐसे इनपुट के लिए है।
- मार्केटिंग और पैकेजिंग – जैविक उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के लिए केवल खेती करना पर्याप्त नही है। उसकी पैकेडिंग, ब्रांडिंग, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग भी जरूरी है। इसके लिए PKVY के तहत तीन वर्षो के लिए 4,500 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित है।
- प्रमाणन – जैविक उत्पाद की बाजार मे विश्वसनीयता के लिए प्रमाणन महत्वपूर्ण है। इसके लिए योजना के तहत 3,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता तीन वर्षो के लिए प्रमाणन और अवशेष यानी Residue Analysis के लिए निर्धारित है।
- प्रशिक्षण और निर्माण क्षमता – जैविक खेती केवल रासायनिक खाद बंद कर देने का नाम नही है। इसमे मिट्टी प्रबंधन, जैविक पोषक तत्व, जैविक कीट नियंत्रण, फसल चक्र और जैविक इनपुट के उपयोग की सही जानकारी जरूरी है। इसलिए 9,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की राशी तीन वर्षो मे प्रशिक्षण जागरूकता और निर्माण क्षमता जैसी गतिविधियो के लिए निर्धारित है।
PKVY मे किसानो को क्या क्या लाभ मिलेगा?
Paramparagat Krishi Vikas Yojana को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि इसे केवल पैसा देने वाली योजना न समझकर जैविक खेती की पूरी व्यवस्था के रुप मे देखा जाए।
- जैविक खेती के लिए आर्थिक सहायता – सबसे प्रत्यक्ष लाभ 15 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता है। इसमे किसानो को जैविक इनपुट की लागत मे सहायता मिलती है।
- जैविक खेती का प्रशिक्षण – किसानो को जैविक कृषि पद्धतियो के बारे मे प्रशिक्षण और जागरूकता प्रदान की जाती है।
- जैविक प्रमाणन – योजना मे प्रमाणन से जुड़ी गतिविधियो के लिए भी वित्तीय सहायता दिये जाने का प्रावधान है।
- बाजार से जुड़ने की कौशिश – Paramparagat Krishi Vikas Yojana की सबसेखास बात यह है कि उत्पादन के बाद उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने पर भी ध्यान दिया जाता है। सरकार ने जैविक उत्पादो की बिक्री और बाजार सम्पर्क बढ़ाने के लिए विभिन्न माध्यमो के साथ साथ Buyer-Seller Meeting, Exhibition और Organic Festivals जैसी गतिविधियो को बढ़ावा देने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा FPOs को डिजिटल बाजारो मे जोड़ने के भी प्रयास किए गए है।
PKVY मे क्लस्टर मॉडल क्या है और क्यो महत्वपूर्ण है?
क्लस्टर आधारित जैविक खेती योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं मे से एक है। दिसंबर 2025 मे केन्द्र सरकार ने बताया था कि Paramparagat Krishi Vikas Yojana के तहतजैविक खेती को 500 से 1,000 हेक्टेयर के Contiguous Area वाले क्लस्टर के माध्यम से लागू किया जा रहा था। इसमे लगभग 500 किसान शामिल हो सकते है।
क्लस्टर मॉडल के कई व्यवहारिक फायदे है चलिए जानते है:
- एक ही क्षेत्र मे किसानो को सामूहिक प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
- जैविक खेती की प्रक्रियाओ को एक समान तरीके से लागू करना आसान होता है।
- प्रमाणन प्रक्रिया सामूहिक रुप से व्यवस्थित की जा सकती है।
- जैविक उत्पाद की सामूहिक ब्रांडिंग की संभावना बढ़ती है।
- बड़ी मात्रा मे उत्पादन होने पर खरीदारो से सम्पर्क करना आसान होता है।
- किसानो की बाजार सौदे बाजी क्षमता मे सुधार की संभावना रहती है।
सरकार का जोर छोटे व सीमान्त किसानो को क्लस्टर मे शामिल करने पर भी रहा है।
PKVY 2026 मे कितने किसानो को लाभ मिला?
केन्द्र सरकार के अगस्त 2026 के अनुसार जून 2026 तक योजना के तहत 18.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर हो चुका था। और 33.63 लाख किसानो को लाभ प्राप्त हो चुका है। यह आकड़ा योजना की शुरूआत से लेकर जून 2026 तक का संचायी आकड़ा है। इसे केवल 2026 की नए लाभार्थियो की संख्या समझना उचित नही है। मार्च 2026 की सरकारी जानकारी मे 31 31 दिसंबर 2025 कर 18.84 लाख हेक्टेयर और 33.93 लाख किसानो का आकड़ा दिया गया था। अलग अलग रिपोर्ट मे कट ऑफ तारीख और डेटा अपडेट के कारण आकड़ो मे अंतर दिखाई दे सकता है।
उत्तर प्रदेश मे Paramparagat Krishi Vikas Yojana 2026
उत्तर प्रदेश के किसानो के लिए यह योजना विशेष रुप से प्रासंगिक है। क्योकि राज्य मे कृषि का बड़ा आधार है। और जैविक खेती के लिए अलग अलग क्षेत्रो मे क्लस्टर एंव प्रदर्शन की गतिविधिया संचालित की गई है।
- इटावा मे 20 PKVY क्लस्टर बनाए गए थे। इन क्लस्टरो मे 400 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इससे 673 किसान लाभान्वित हुए है।
- फतेहपुर मे भी 20 क्लस्टर बनाए गए थें। वहां 400 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल हैं। फतेहपुर मे 889 किसानो को लाभ मिलने की जानकारी सामने आई है।
इसका मतलब यह नही है कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले मे हर किसान को स्वत: PKVY का लाभ मिल जाएगा। योजना का जमीनी क्रियान्वयन राज्य की स्वीकृत कार्य योजना, सक्रिय क्लस्टर और सम्बन्धित विभाग/संस्था के माध्यम से होता है।
Paramparagat Krishi Vikas Yojana के लिए कौन पात्र है?
इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए केवल किसान होना पर्याप्त नही है। योजना का कार्यान्वयन क्लस्टर आधारित है। इसका संचालन राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश की कार्य-योजना के अनुसार किया जाता है। इसमे छोटे सीमान्त किसानो को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। इसलिए इच्छुक किसान को अपने जिले के सम्बन्धित विभाग/संस्था मे यह पता करना चाहिए कि:
- Paramparagat Krishi Vikas Yojana का क्लस्टर उनके क्षेत्र मे सक्रिय है या नही।
- सम्बन्धित क्लस्टर मे नए किसानो का नामांकन हो रहा है या नही।
- प्रमाणन के लिए कौन सी व्यवस्था लागू है।
- DBT के लिए किसान का बैंक खाता और जरूरी रिकॉर्ड सही है या नही।
- इच्छुक किसान के पास पर्याप्त दस्तावेज़ उपलब्ध है या नही।
- राज्य कृषि विभाग ने उस क्षेत्र के लिए कौन सी गतिविधिया स्वीकृत कर रखी है।
हालांकि पात्रता और नामांकन की अंतिम प्रक्रिया राज्य के कार्यान्वयन तंत्र और उस समय लागू दिशा-निर्देशो पर निर्भर करेगी।
PKVY 2026 के लिए आवेदन कैसे करें?
Paramparagat Krishi Vikas Yojana मे राज्य सरकार, क्लस्टर और प्रमाणन से जुड़ी संस्थाओं की भूमिका रहती है। इस योजना मे आवेदन सामान्य ऑनलाइन फॉर्म भरकर नही किया जा सकता है। आमतौर पर इसकी प्रक्रिया को इस प्रकार समझा जा सकता है।
(किसान/किसानो का समूह – क्लस्टर गठन – जैविक खेती की कार्य योजना – प्रमाणन/पंजीकरण – राज्य स्तर की स्वीकृति – जैविक खेती एंव प्रशिक्षण – प्रत्यक्ष लाभ अन्तरण या अन्य सहायता – प्रमाणन एंव बाजार से जुड़ाव)
एक रिपोर्ट के अनुसार Regional Councils किसानो को नामांकन और प्रमाणन की प्रक्रिया मे मार्गदर्शन देते है। सम्बन्धित प्रस्तावो को Annual Action Plan मे शामिल किया जाता हैं और स्वीकृति के बाद सहायता निर्धारित तंत्र के माध्यम से किसानो तक पहुंचाई जाती है। इसलिए 2026 मे आवेदन की वास्तविक प्रक्रिया जानने के लिए किसान अपने राज्य के कृषि विभाग, जिला कृषि कार्यालय या योजना के तहत कार्यरत अधिकृत संस्था से सम्पर्क कर सकते है।
जैविक प्रमाणन मे PGS-India क्या है?
जैविक प्रमाणन की लागत और प्रक्रिया छोटे व सीमान्त किसानो के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे मे PGS-India एक उपयोगी व्यवस्था है। इसका पूरा नाम Participatory Guarantee System India है। यह समुदाय आधारित प्रमाणन प्रणाली हैं। इसमे किसान समूह एक दूसरे की खेती की प्रक्रियाओं की जांच और सत्यापन मे भाग लेते है। इसका प्रमुख उपयोग बाजार घरेलु बाजार के लिए जैविक उत्पादन मे प्रमाणन का होता है। इसके विपरित अन्तराष्ट्रीय बाजारो मे जैविक उत्पादो के लिए NPOP जैसी मान्यता प्राप्त प्रमाणन व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
PKVY मे जैविक प्रमाणन क्यो जरूरी है?
अगर किसान जैविक खेती करता हैं तो उसके उत्पाद की पहचान और विश्वसनीयता के लिए जैविक प्रमाणन जरूरी ही नही महत्वपूर्ण भी है। इसके लिए Paramparagat Krishi Vikas Yojana के तहत प्रमाणन और Residue Analysis के लिए भी सहायता निर्धारित है। भारत मे जैविक खेती के सम्बन्ध मे PGS-India जैसी सहभागी प्रमाणन व्यवस्था का उपयोग किया जाता है। वही कुछ बाजारो और निर्यात सम्बन्धित जरूरतो के लिए NPOP आधारित प्रमाणन की भूमिका होती है। इसलिए किसान को अपनी उपज किस बाजार मे बेचनी हैं, इसके अनुसार प्रमाणन की जरूरत को समझना जरूरी है।
Large Area Certification क्या है?
PKVY से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विकास LAC है। सरकार ने साल 2020-21 मे ऐसे क्षेत्रो मे तेजी से जैविक प्रमाणन को बढ़ावा देने के लिए यह पहल शुरू की है। जिससे लंबे समय तक रासायनिक खेती नही की गई थी। जैसे कुछ आदिवासी, द्वीपीय और पर्यावरणीय रुप से संरक्षित क्षेत्र। ऐसे क्षेत्रो मे सामान्य रुपांतरण अवधि की तुलना मे प्रमाणन की प्रक्रिया को तेज करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योकि भारत मे कुछ क्षेत्र प्राकृतिक रुप से कम रासायनिक रासायनिक मुक्त कृषि की स्थिति मे हैं, और वहा जैविक प्रमाणन किसानो के उत्पादो को औपचारिक बाजार पहचान देने मे मदद कर सकता है।
PKVY और PM-PRANAM मे क्या संबंध है?
जैविक खेती को बढ़ावा देने कि दिशा मे Paramparagat Krishi Vikas Yojana जैसी व्यापक पहलो के साथ भी देखा जा सकता है। PM-PRANAM का उद्देश्य राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशो को रासायनिक उर्वरको की खपत को कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है तथा वैकल्पिक पोषक स्त्रोतो और Integrated Nutrient Management को बढ़ावा देना है। मार्च 2026 की जानकारी के अनुसार सरकार ने जैविक, जैव-उर्वरक और मान्य वैकल्पिक पोषक स्त्रोतो को बढ़ावा देने तथा PKVY जैसी मैजूदा योजनाओं का लाभ उठाने पर जोर दिया गया है। इसका व्यापक उद्देश्य कृषि मे पौषक तत्वो का संतुलन उपयोग और टिकाऊ उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
PKVY और प्राकृतिक खेती मे अंतर
जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को एक ही चीज मानना गलत है। PKVY मुख्य रुप से जैविक खेती के लिए सहायता, क्लस्टर, इनपुट, प्रमाणन और बाजार सम्पर्क से जुड़ी है। वही दूसरी और केन्द्र सरकार ने National Mission of Nature Farming (NMNF) को प्रकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अलग पहल के रुप मे विकसित किया गया है। इसलिए किसान को अपने क्षेत्र मे लागू योजना के नाम और उनके दिशा निर्देशो को देखकर ही आवेदन करना होगा।
क्या PKVY में 31,500 रुपये सीधे बैंक खाते मे आएगें?
नही, इस बाद को स्पष्ट रुप से समझना जरूरी है। इस योजना के तहत 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तीन वर्षो के लिए निर्धारित कुल सहायता है। इसमे केवल 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर किसान को डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते मे जैविक इनपुट के लिए प्राप्त होगें। बाकि राशी योजना के निर्धारित घटको के अनुसार मार्केटिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, वैल्यु एडिशन, प्रमाणन, Residue Analysis, प्रशिक्षण और कार्य क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियो के लिए है। इसलिए PKVY मे हर किसान को 31,500 रुपये नकद दिये जाएगें। यह केवल एक भ्रामक जानकारी है।
किसानो के लिए PKVY का वास्तविक महत्व
जैविक खेती अपनाने का निर्णय केवल सरकारी सहायता मिलने के आधार पर नही किया जाना चाहिए। किसानो को अपनी मिट्टी, पानी की उपलब्धता, फसल, स्थानीय बाजार, जैविक इनपुट की उपलब्धता और प्रमाणन की जरूरतो को ध्यान मे रखना चाहिए। ऐसे मे किसानो के लिए PKVY का वास्तविक लाभ तब अधिक प्रभावी हो सकता हैं जब किसान :
- समूह या क्लस्टर के साथ मिलकर जैविक खेती करें।
- जैविक इनपुट का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग सीखें।
- प्रमाणन प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करें।
- उत्पादन के साथ बाजार की योजना भी बनाएं।
- स्थानीय स्तर पर प्रंसस्करण, पैकेडिंग और ब्रांडिंग की संभावनाएं तलाशें।
- फसल विविधिकरण और मिट्टी की सेहत का ध्यान रखें।
2026 मे PKVY की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
PKVY की सबसे बड़ी खासियत 2026 मे इसकी end-to-end approach है। सरकार की यह योजना केवल यह नही है कि किसानो को केवल जैविक खाद के लिए कुछ सहायता दे दी जाए। इसकी पूरी रूप रेखा इस क्रम को मजबूत करने पर केन्द्रित है।
जैविक इनपुट – उत्पादन – प्रशिक्षण – प्रमाणन – पैकेजिंग – ब्रांडिंग – बाजार – उपभोक्ता
अगस्त 2026 की जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत उत्पादन से लेकर Processing, Certification, Marketing तक सहायता पर जोर दिया गया है। यही कारण है कि Paramparagat Krishi Vikas Yojana को केवल सब्सिडी योजना की बजाए जैविक कृषि की पूरी मूल्य श्रृखंला विकसित करने वाली एक पहल के रुप मे समझना अधिक उचित है।
PKVY मे किसानो के लिए चुनौतियां
जैविक खेती मे बदलाव एक दिन मे नही होता है। शुरूआत मे उत्पादन प्रणाली बदलने, जैविक इनपुट की व्यवस्था करने और बाजार खोजने मे अतिरिक्त मेहनत लग सकती है। सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि जैविक उत्पाद के लिए केवल उत्पाद पर्याप्त नही है। इसके लिए प्रमाणन और विश्वसनीय बाजार सम्पर्क भी जरूरी है। अगर किसान जैविक उत्पाद तैयार करता हैं लेकिन उसके पास प्रमाणन, उचित पैकेजिंग या बाजार तक पहुंच नही हैं तो उसे सामान्य उत्पाद के मुकाबले आपेक्षित लाभ मिलना कठिन हो सकता है। इस वजह से योजना का क्लस्टर, प्रमाणन और मार्केटिंग आधारित मॉडल महत्वपूर्ण है।
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PKVY 2026 मे किसानो के लिए जरूरी बातें
2026 मे Paramparagat Krishi Vikas Yojana को समझते समय इन बातो का ध्यान मे रखना बहुत जरूरी है।
- यह योजना जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली योजना है।
- 2024 के बाद इसमे प्रमुख घटको को शामिल किया गया है।
- इसमे तीन वर्षो मे 31,500 प्रति हेक्टेयर सहायता का प्रावधान है।
- इसमे 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर डीबीटी के माध्यम से किसानो को जैविक इनपुट के लिए दिया जाता है।
- योजना मे उत्पादन के साथ साथ प्रमाणन, प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार पर भी जोर दिया गया है।
- किसानो को अपने जिले मे सक्रिय PKVY क्लस्टर और अधिकृत कार्यान्वयन संस्था की जानकारी लेकर ही आवेदन/नामांकन करना चाहिए।
किसानो के लिए जरूरी सावधानियाँ
PKVY के अन्तर्तग आवेदन करने वाले किसानो के लिए कुछ जरूरी सावधानियाँ इस प्रकार है :
- 31,500 रुपये पूरी तरहा DBT न समझें – इसमे डीबीटी का हिस्सा केवल 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर है।
- स्थानीय क्लस्टर की जानकारी लें – हर किसान अपने आप योजना मे शामिल नही हो जाता है। स्थानीय कार्यान्वयन व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
- प्रमाणन नियम समझें – जैविक उत्पाद को बाजार मे बैचने से पहले सम्बन्धित प्रमाणन जरूरतो को समझना जरूरी है।
- बिचौलियो से सावधान रहें – सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर अनधिकृत शुल्क मांगने वालो से सावधान रहें।
- बाजार को पहले समझें – जैविक खेती शुरू करने से पहले यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि आपके क्षेत्र मे जैविक उत्पाद के लिए बाजार और खरीदार भी उपलब्ध है या नही।
निष्कर्ष
Paramparagat Krishi Vikas Yojana 2026 भारत मे जैविक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। इसकी खासियत केवल आर्थिक सहायता देना नही हैं, बल्कि किसानो को जैविक खेती की पूरी प्रक्रिया से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। तीन वर्षो मे 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता, जिसमे 15,000 प्रति हेक्टेयर डीबीटी के रुप मे किसानो को प्राप्त होती है। जो जैविक खेती अपनाने वाले किसानो को उपयोगी समर्थन प्रदान करती है।
हालांकि किसी भी सरकारी योजना की तरहा PKVY का वास्तविक लाभ स्थानीय स्तर पर उसके क्रियान्वयन, क्लस्टर की उपलब्धता, प्रमाणन व्यवस्था और बाजार सम्पर्क पर निर्भर करती है। इसलिए इच्छुक किसान केवल ऑनलाइन जानकारी के आधार पर निर्णय लेने के बजाए अपने जिला कृषि विभाग या अधिकृत Paramparagat Krishi Vikas Yojana 2026 कार्यान्वयन संस्था से वर्तमान वर्ष की पात्रता, क्लस्टर और आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि अवश्य करें। योजना की वास्तविक सुविधा और नामांकन स्थानीय कार्यान्वयन पर निर्भर करता है।
अक्षर पूछे जाने वाले प्रश्न
PKVY मे कितनी सहायता मिलती है?
इस योजना के तहत तीन वर्षो के लिए 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित सहायता दी जाती है। इसमे से 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रत्यक्ष लाभ अन्तरण के माध्यम से सीधे किसानो बैंक खाते मे जैविक इनपुट के लिए भेज दी जाती है।
क्या उत्तर प्रदेश के किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते है?
हां, योजना के स्थानीय निर्धारित मानको के आधार पर उत्तर प्रदेश राज्य के किसान भी इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते है।